द एक्सिडेंटल एमपी

ज्योतिषी ने कहा टिकट ले आओ, जीत जाओगे…

 

रेहान अंसारी (पंचपथ)

 सीतापुर के एक लोकसभा सांसद यानी एमपी हुए हैं सूरज लाल वर्मा। उनका नाम तब भी कोई नहीं जानता था जब वह एमपी बन गए तो बाद में कौन याद रखता, क्योंकि वह एक संयोग था, इत्तेफाक था कि वह एमपी बन गए। उन्हें एक्सीडेंटल एमपी कहा जा सकता है।
सन 1962, जब देश में तीसरा लोकसभा चुनाव हुआ जिसमे सीतापुर लोकसभा संसदीय क्षेत्र से एक ऐसा प्रत्याशी खड़ा हुआ जिसे कोई नहीं जानता था, और वह जीत भी गया। यह बड़ा ही चौकाने वाला नाम था सूरज लाल वर्मा का। बता दें कि वह सासंद जी सीतापुर में एक सामान्य परिवार से आते थे और एक सामान्य आटा चक्की चलाते थे। राजनीति से उनका कुछ भी लेना देना नहीं था।
लेकिन उनके सांसद बनने का समय आ चुका था। चुनाव घोषित हुआ तो वर्मा जी ने भी चुनाव लड़ने की इच्छा ज़ाहिर कि। उस समय चुनाव प्रकिया से लेकर सियासी पार्टियों की भी चीज़ें बहुत ही सामान्य हुआ करती थीं। तब वर्मा जी भारतीय जनसंघ जो कि अब भारतीय जनता पार्टी है, उसके दफ्तर पहुंचे तब पार्टी का दफ्तर भी बहुत सामान्य हुआ करता था और ज़मीन पर दरा बिछा कर ही एक कमरे में चला करता था। वर्मा जी ने पार्टी के सामने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर करते हुए पार्टी से टिकट मंगा तो वर्मा जी से पूछा गया कि आप क्या करते हैं ! तो वर्मा जी ने बेहद सादगी से बता दिया मैं एक आटा चक्की चलाता हूँ। पार्टी ने सोचा ये कोई उद्योगपति है और इनकी फ्लोर मिल है, तो पैसा वैसा भी ठीक ठाक होगा। इस आधार पर वर्मा जी को टिकट दे दिया गया कि ये चुनाव तो लड़ ही लेंगे। लेकिन बाद में पता चला कि ये तो एक सामान्य आटा चक्की चलाते हैं, खैर तब तक टिकट मिल चुका था। सन 1962 के चुनाव का समय आ चुका था और उनके सामने राष्ट्रीय कांग्रेस से दिनेश प्रताप सिंह थे, और सोशलिस्ट पार्टी से बच्चो लाल यादव और प्रजा पार्टी से माधो प्रसाद मिश्रा और एक निर्दलीय उम्मीदवार हबीब अहमद भी मैदान में थे, पांचो प्रत्याशी चुनावी मैदान में ज़ोर शोर से हुंकार भर रहे थे खैर चुनाव हुए और नतीजे आना शुरू हुए जब नतीजे आना शुरू हुए तो वर्मा जी राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रत्याशी से आगे निकलते हुए दिखाई देने लगे और देखते ही देखते करीब 3377 वोटों से वर्मा जी चुनाव जीत गए। इस चुनाव में राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह को करीब 72865 वोट मिले और सोशलिस्ट पार्टी के बच्चो लाल यादव को 29331 वोट मिले तो वहीं निर्दलीय उम्मीदवार हबीब अहमद को 17239 वोट मिले, इसी के साथ प्रजा पार्टी के माधो प्रसाद मिश्रा को 16767 वोट मिले।
उस समय चुनाव की घोषणा रेडियो पर रात के समय आया करती थी। रात में रेडियो से पता चला कि वर्मा जी चुनाव जीत गए हैं तो उनकी ढुंढइया मची कि वह कहाँ हैं और वर्मा जी छुपे छुपे फिर रहे थे।
फिर आखिरकार उन्हें सामने आना पड़ा, पदार्पण किए तो वर्मा जी से पार्टी ने पूछा कि आपसे टिकट लेने के लिए किसने कहा था, तो वर्मा जी ने फिर से उतनी ही सादगी और भोलेपन से जवाब दिया कि एक ज्योतिषी ने !
इतना सुनते ही जनसंघ के लोग हक्का बक्का रह गए और किसी के मुंह से कुछ नहीं निकला। वर्मा जी ने बताया कि ज्योतिषी ने कहा था इस बार चुनाव का टिकट ले लो तो चुनाव जीत जाओगे तो हमने ले लिया और जीत गए….!
वर्मा जी मूलतः लखनऊ के रहने वाले थे और सीतापुर वालों ने उन्हें जिता दिया तो ऐसे भी प्रत्याशी दिये है सीतापुर ने और वो प्रत्याशी जीते भी हैं सीतापुर से।
रेहान अंसारी की रिपोर्ट

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