सोमवार को अदा की जाएगी ईद-उल-फित्र की नमाज़, अरब मुल्कों में रविवार को मनाई जाएगी ईद

सऊदी अरब में ईद-उल-फित्र का चाँद नज़र आ गया है 30 मार्च को तमाम अरब मुल्कों में ईद-उल-फित्र की नमाज़ अदा की जाएगी। अरब मुल्कों में चाँद दिखने की जानकारी अरब की न्यूज़ एजेंसी हरमैन ने अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) से दी है। इसी के बाबत हिंदुस्तान में अगर रविवार को चांद दिखाई देता है तो सोमवार को ईद-उल-फित्र की नमाज़ अदा की जा सकती है। अमूमन के वर्षों से ऐसा होता आया है कि अरब मुल्कों में जिस दिन ईद-उल-फित्र की नमाज़ अदा की जाती है उसके अगले दिन यहाँ ईद की नमाज़ अदा की जाती है।

ईद-उल-फित्र जिसे हिंदी और उर्दू में ईद के नाम से जाना जाता है, इस्लाम धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख धार्मिक पर्व है। यह रमजान महीने के समाप्त होने पर मनाई जाती है, जो इस्लामिक कैलेंडर के नवां महीने (शव्वाल) के पहले दिन होती है। इस साल, ईद का त्योहार सोमवार, 31 मार्च को मनाया जाएगा। यह दिन एक नए चाँद के दर्शन के बाद घोषित किया जाता है और इसका आयोजन पूरे विश्व में मुस्लिम समुदाय द्वारा हर्षोल्लास और धार्मिक श्रद्धा के साथ किया जाता है।

रमजान का महत्व:

रमजान इस्लामिक कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण महीना है, जिसमें मुस्लिम समुदाय 29 या 30 दिनों तक उपवासी रहते हैं, यानी सूर्योदय से सूर्यास्त तक खाने और पीने से बचते हैं। यह अवधि न केवल शारीरिक परिश्रम की परीक्षा होती है, बल्कि यह आत्म-नियंत्रण, धैर्य, और गरीबों के लिए सहानुभूति की भावना को प्रबल करने का समय भी है। इस महीने का उद्देश्य केवल उपवास नहीं है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से अपने आप को शुद्ध करना है।

ईद की रात्रि का महत्व:

रमजान के आखिरी दिन को “ईद की रात” कहा जाता है। इस रात को, मुस्लिम समुदाय अल्लाह से अपनी प्रार्थनाओं के साथ माफी मांगते हैं और अपने अच्छे कार्यों के लिए आभार व्यक्त करते हैं। इस दिन को लेकर विभिन्न मुस्लिम देशों में विशेष तैयारियाँ होती हैं जैसे की मस्जिदों में विशेष प्रार्थनाएँ, घरों में सजावट, और आमतौर पर रात्रि को परिवारों के साथ समय बिताने की परंपरा होती है।

सोमवार को क्यों मनाई जाएगी ईद?

ईद के दिन का निर्धारण चाँद के दर्शन पर निर्भर करता है। चाँद का दिखाई देना यह संकेत देता है कि रमजान समाप्त हो चुका है और ईद का दिन आया है। चाँद को देखना एक महत्वपूर्ण धार्मिक कृत्य है और इस दिन की घोषणा इस पर आधारित होती है। हर देश और क्षेत्र में चाँद के देखने की प्रक्रिया अलग होती है, लेकिन भारत में चाँद के देखने के बाद विभिन्न धार्मिक संस्थाएँ इसकी पुष्टि करती हैं।

इस साल, भारतीय उपमहाद्वीप में चाँद का दर्शन सोमवार को हुआ है, जिससे यह तय हुआ कि ईद का पर्व 31 मार्च को मनाया जाएगा। हालांकि, यह दिन कभी-कभी कुछ देशों में एक दिन पहले या एक दिन बाद मनाया जाता है, क्योंकि चाँद के दर्शन की तिथि में भिन्नता हो सकती है।

ईद का त्योहार:

ईद के दिन मुसलमान अपने परिवार और दोस्तों के साथ खुशियाँ मनाते हैं। दिन की शुरुआत ईद की नमाज़ से होती है, जो एक विशेष सामूहिक नमाज़ होती है, जिसे आमतौर पर मस्जिदों में अदा किया जाता है। इसके बाद, परिवार और रिश्तेदार एक-दूसरे के घर जाकर बधाई देते हैं। ईद के दिन विशेष पकवान बनाए जाते हैं जैसे बिरयानी, सेवईं, मिठाइयाँ और अन्य पारंपरिक व्यंजन। साथ ही, लोग एक-दूसरे को गिफ्ट भी देते हैं, और गरीबों को “जकात” (दान) भी दी जाती है, ताकि सभी लोग इस दिन का आनंद उठा सकें।

समाज में ईद का प्रभाव:

ईद का पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह समाज में एकता और भाईचारे को भी प्रोत्साहित करता है। रमजान के दौरान उपवासी रहने के बाद, ईद एक ऐसा अवसर होता है, जब सभी लोग अपने अंतर को शुद्ध करके एक-दूसरे से मिलते हैं। इस दिन, समाज में विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोग आपस में प्रेम और सम्मान की भावना साझा करते हैं।

निष्कर्ष:

ईद-ul-Fitr एक ऐसा पर्व है जो न केवल मुस्लिम समुदाय के लिए धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह समाज के सभी वर्गों के लिए एक अवसर होता है। सोमवार को मनाई जाने वाली ईद, एक तरफ रमजान की कठिनाइयों से मुक्ति का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर यह सामाजिक सद्भाव और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देने का दिन भी है। यह दिन इस बात का प्रतीक है कि अपने धार्मिक कर्तव्यों को निभाने और एकजुट होकर खुशी मनाने में कोई अंतर नहीं आता।

सीतापुर शहर की किस मस्जिद में कितने बजे अदा की जाएगी ईद-उल-फित्र की नमाज़:

ईदगाह शहर सीतापुर 8:00 बजे
मरकज़ मस्जिद कोट 9:00 बजे, जामा मस्जिद शेख सरायं 7:30 बजे, मस्जिद हकीम जी 7:00 बजे, जामा मस्जिद मिरदही टोला 7:15 पर, मदनी मस्जिद जामिआ सुफ़्फ़ा 8:00 बजे, मस्जिद बैतुर्रख चवकर घर 7:45 पर, मस्जिद उस्मान गनी चक्कर घर 8:15 बजे, मस्जिद हमजा मिरदही टोला 9:00 बजे, मस्जिद तकिया जलाल शाह 7:30 बजे, मुराद अली मस्जिद 7:30 बजे, मक्की मस्जिद चौबे टोला 7:00 बजे, मस्जिद तकिया फत्तन सययं 7:00 बजे, मस्जिद जोगी टोला 8:45 बजे, मदीना मस्जिद तरीनपुर 9:00 बजे, मस्जिद अब्दुल्ला अम्मार 8:30 बजे, मस्जिद बराअ किषन कोट 7:00 बजे, मस्जिद बट्स गंज 7:00 बजे, मस्जिद सादिक पुस्वा 8:30 बजे, मस्जिद पुलिस लाइन 7:30 बजे

मस्जिद हुसैन गंज जीटी रोड 8:00 बजे अदा की जाएगी।
यह जानकारी शहर इमाम ईदगाह की तरफ से दी गई है।

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