
- दरी को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान, 24-25 अक्टूबर को होगा क्रेता-विक्रेता सम्मेलन
- जिलाधिकारी ने प्रेस वार्ता कर दी विस्तृत जानकारी, मुख्य विकास अधिकारी संग उद्योग उपायुक्त निरंतर कर रहीं प्रयास
- 9 देशों और 8 राज्यों के खरीदार होंगे शामिल, 500 बुनकर परिवारों की भागीदारी की उम्मीद
सीतापुर (पंच पथ न्यूज़)। जनपद की पारंपरिक दरी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन एक बड़ी पहल करने जा रहा है। एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत चयनित सीतापुर की दरी को बढ़ावा देने के लिए 24 और 25 अक्टूबर को सीतापुर शिक्षण संस्थान, रस्यौरा में प्रथम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में नौ देशों और आठ राज्यों के खरीदार हिस्सा लेंगे। प्रशासन को उम्मीद है कि इस आयोजन से स्थानीय बुनकरों को नए बाजार और कारोबार के अवसर मिलेंगे।
सदियों पुरानी रही है जनपद की दरी
सीतापुर की दरी अपनी आकर्षक डिजाइन, मजबूत गुणवत्ता और उत्कृष्ट बुनाई के लिए देश-विदेश में पहचान रखती है। जिले में दरी बुनाई की परंपरा लगभग 150 से 200 वर्ष पुरानी मानी जाती है। बुनकर परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस कला को आगे बढ़ाते आ रहे हैं। सीतापुर में तैयार होने वाली दरियों की मांग अमेरिका, यूरोप और मध्य-पूर्व सहित कई देशों में है। यह हस्तशिल्प स्थानीय कारीगरों की आजीविका के साथ जिले की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इन देशों और राज्यों के लोग होंगे शामिल
जिला प्रशासन के अनुसार, सम्मेलन में जापान, फिनलैंड, जर्मनी, इजराइल, दक्षिण अफ्रीका, पनामा, सऊदी अरब, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त अरब अमीरात के खरीदार शामिल होंगे। वहीं उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, केरल, तेलंगाना, तमिलनाडु और महाराष्ट्र के खरीदार भी अपनी सहभागिता करेंगे। इससे दरी उत्पादकों और बुनकरों को सीधे खरीदारों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

आयोजन में दरी उत्पादों के 35 स्टाल लगाए जाएंगे। इसके अलावा दरी बुनाई की प्रक्रिया को प्रदर्शित करने के लिए दो स्टालों पर लाइव डेमो यानी बुनाई का सजीव प्रदर्शन किया जाएगा। सम्मेलन के दोनों दिन लगभग 500 बुनकर परिवारों की भागीदारी प्रस्तावित है।
कार्यक्रम में स्थानीय उत्पादों और खानपान को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके तहत एक जनपद एक व्यंजन योजना के अंतर्गत सीतापुर के समोसे, मिर्च पकौड़े, पेड़े और मलाई मक्खन के स्टाल लगाए जाएंगे। इसके साथ ही लखनऊ मंडल के हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, लखनऊ और लखीमपुर खीरी के चयनित व्यंजनों के स्टाल भी आकर्षण का केंद्र होंगे।
जिला प्रशासन की यह पहल सीतापुर की पारंपरिक दरी को बड़े बाजारों तक पहुंचाने, स्थानीय हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करने और बुनकर परिवारों के लिए व्यापार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस सम्मेलन पर है कि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी से सीतापुर के दरी उद्योग को कितना नया कारोबार और बाजार मिलता है।



