
● सुहेल वहीद
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सन था 1973 जब ज़ियाउर्रहमान अंसारी को केंद्र सरकार में पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने डिप्टी मिनिस्टर बनाया था। मंत्री बनने के बाद पहली बार वह सीतापुर आए थे। औद्योगिक विकास विभाग मिला था उन्हें, इस नाते उन्होंने दिन में प्लाईवुड आदि का निरीक्षण किया और अज़ीज़ अहमद अंसारी, एडवोकेट के घर शाम की चाय से फुरसत पाकर मुस्लिम जूनियर हाईस्कूल के मैनेजर रफीक अहमद अंसारी के घर के एक हिस्से में बने हुए खूबसूरत हाफ़िज़ पार्क में आए।उनके साथ उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री अमीन अंसारी भी थे।
दिन भर के दौरे और लोगों से मिलने जुलने के बाद शाम की चाय उन्होंने पुलिस लाइन के पास अज़ीज़ अहमद अंसारी एडवोकेट के यहां पी थी और रात के खाने पर रफ़ीक साब के घर दावत में शामिल होने आए थे। करीब सौ लोगों को बुलाया गया था उस दावत में। इस दावत की सबसे ख़ास बात यह थी कि इसमें जियाउर्रहमान अंसारी को मछली के रसगुल्ले खिलाए गए और उन्हें एहसास भी नहीं हुआ कि उन्होंने मछली के रसगुल्ले खाए हैं।
राष्ट्रपति पदक से सम्मानित, मशहूर शायर और सीतापुर की जानी मानी शख़्सियत मस्त हफ़ीज़ रहमानी ने यह बात बताई। उन्होंने बताया कि वह दावत बड़ी शानदार थी और उसके लिए जो डिशेज़ तैयार की गई थीं, वह प्रोफेशनल बावर्ची ने नहीं तैयार की थीं बल्कि ‘सीतापुर टाइम्स’ के प्रधान सम्पादक बशीर अहमद अंसारी जो बशीर भेखा के नाम से मशहूर थे उनके समधी हसन अली ने तैयार की थीं। हसन अली सरकारी मुलाजिम थे, खाना बेहद उम्दा पकाते थे, लेकिन शौकिया, खास ख़ास मौक़ों पर अपनों के लिए। बशीर साहब ने उनसे इस मौक़े पर रफीक अंसारी साब के कहने पर खाना पकवाया था।
रहमानी साहब बताते हैं कि जियाउर्रहमान अंसारी की उस दिन सीतापुर आमद रफीक अंसारी साहब की गुज़ारिश पर हुई थी। रफ़ीक अंसारी साब जियाउर्रहमान की जब तब माली मदद भी किया करते थे क्योंकि ज़िया साहब बेहद सादगी भरी ज़िन्दगी जीते थे। उन्होंने कभी अपने ओहदे का फ़ायदा नहीं उठाया इसीलिए पैसे की तंगी रही। रहमानी साब ने बताया कि दो बार वह ख़ुद रफीक अंसारी साब के दिए पैकेट को लेकर ज़ियाउर्रहमान अंसारी के देने लखनऊ गए। मुस्लिम जूनियर हाई स्कूल के मैनेजर रफीक अंसारी थे और रहमानी साब स्कूल के प्रिंसिपल थे, रफीक अंसारी, रहमानी साब पर भरोसा भी बहुत करते थे।
मस्त हफ़ीज़ रहमानी बताते हैं कि उस दावत में शामिल होने आए उस वक़्त यूपी सरकार में मिनिस्टर अमीन अंसारी का उन्होंने सीतापुर टाइम्स के लिए इंटरव्यू भी किया था। तब वह सीतापुर टाइम्स के सम्पादक भी थे। रहमानी साहब अपने और ज़ियाउर्रहमान अंसारी के ताल्लुक़ात के बारे में बताते हैं कि लखनऊ में दारुलशफा में बी ब्लाक में ज़िया साहब के फ्लैट में वह क़रीब तीन महीने रहे और कभी किसी ने उनसे पूछा तक नहीं कि आप यहां क्यों रहते हैं। वह बताते हैं कि जियाउर्रहमान अंसारी के वालिद साहब हबीबुर्रहमान गंज मुरादाबाद के बेहद मकबूल सूफी संत फज़लुर्रहमान साहब के मुरीद थे, उनसे बात भी थे। इस नाते मस्त हफ़ीज़ रहमानी के वह पीर भाई हुए, ये रिश्ता बड़ा पक्का होता है तो उनसे कोई कैसे पूछ सकता था कि यहाँ आप क्यों रह रहे हैं ।
रहमानी साहब के मुताबिक़ रफ़ीक अंसारी के घर पर हुई उस दावत के बाद जब जियाउर्रहमान अंसारी को बताया गया कि वह जो रसगुल्ले थे वह मछली के बनाए गए थे तो उन्होंने बड़े ताइज्जुब का इज़हार किया और कहा कि अरे वाह थे तो कमाल के, बेहद शानदार।
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