17 घंटे के सियासी संग्राम के बाद सांसद राकेश राठौर का आमरण अनशन समाप्त

  • उच्चाधिकारियों के मान मुनव्वल के बाद माने सांसद।
  • ASP, SDM, CO व सिटी मजिस्ट्रेट ने दूर की सांसद की नाराज़गी।

सीतापुर (पंच पथ न्यूज़)। करीब 17 घंटे चले पुलिस, प्रशासन और सांसद के बीच सियासी संग्राम के बाद सोमवार दोपहर में खत्म हुआ सांसद राकेश राठौर का आमरण अनशन। शहर में चले इस हाई वोल्टेज ड्रामा के बाद अब तापमान में कुछ गिरावट आई है। लेकिन सूरज की तपिश अभी भी बरकरार है।
आपको बताते चले यह पूरा मामला रविवार शाम को शुरू हुआ जब कांग्रेस सांसद राकेश राठौर अपने आवास से निकले इसी बीच वहाँ पहुंची पुलिस ने सांसद राकेश राठौर को रोक लिया। यह पूरा मामला इस लिये हुआ क्योंकि पुलिस का कहना है की उनके पास इनपुट है सांसद राकेश राठौर गाज़ीपुर जा रहे थे। आपको बता दें कि गाज़ीपुर में एक बच्ची की हत्या हो गई थी जिससे मिलने के लिए कांग्रेस का एक प्रतिनिधि मंडल वहाँ जाना चाहता था इसी को रोकने के लिए सांसद को उनके आवास पर ही रोक दिया गया।तो वहीँ सांसद राकेश राठौर का कहना था कि मैं जनपद में ही अपने एक निजी कार्यक्रम में जा रहा हूँ मैं गाज़ीपुर नही जा रहा। उन्होंने यह भी कहा कोतवाल से की आप चाहें तो साथ चले। लेकिन वह नहीं माने।

आवास के बाहर अनशन पर बैठे सांसद राकेश राठौर व उनके समर्थक
आधी रात में सांसद आवास के बाहर का दृश्य

इसी को लेकर रविवार शाम को सांसद आवास के बाहर सियासी पारा आसमान छूने लगा। उधर सूरज ढल चुका था लेकिन तापमान ऊपर चढ़ रहा था। पुलिस लगातार सांसद को रोकती रही तो वहीं सांसद अपने कार्यक्रम में जाने के लिए ज़ोर लगाते रहे लेकिन वह असफल हो गए। सांसद और पुलिस ने बीच तीखी नोकझोक व धक्कामुक्की भी देखने को मिली। सांसद के साथ उनके पुत्र रत्नम राठौर भी मौजूद रहे और लगातार कोशिशें करते रहे पुलिस से बातचीत करते रहे लेकिन उनको भी सफलता नहीं मिली। जिससे नाराज़ होकर सांसद वहीँ अनशन पर बैठ गए। देखते ही देखते उनके समर्थकों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। और उधर पीएसी समेत कई थानों की पुलिस फ़ोर्स भी बढ़ती रही। पुलिस प्रशासन लगातार सांसद को मनाने की कोशिश करता रहा। लेकिन वो मानने को तैयार नहीं हुए।

पुलिस के उच्च अधिकारी भी कुछ देर बाद मौके पर आ गए और स्थिति को संभालने में लग गए। सांसद और पुलिस प्रशासन के बीच कई दौर बातचीत के चले। लेकिन सांसद अपने पर टिके रहे और अपने मान सम्मान की बात करते हुए अपने आवास के गेट पर ही बैठे रहे। सीओ एसडीएम उनसे देर रात तक चाय पीने की मिन्नते करते रहे लेकिन बात नहीं बनी।

सांसद राकेश राठौर से वार्ता करतीं सिटी मजिस्ट्रेट मीनाक्षी पांडेय

पूरी रात चले इस सियासी संग्राम के बाद सुबह फिर से बातचीत का दौर शुरू हुआ। इस बीच सिटी मजिस्ट्रेट मीनाक्षी पांडेय को बातचीत के लिये भेजा गया। सिटी मजिस्ट्रेट ने वही दरवाज़े पर बैठ कर सांसद राकेश राठौर से वार्ता शुरू की। कई घंटे चली इस वार्ता के बाद कुछ सहमति बनते दिखाई दी। सांसद ने आरोप लगाया कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को पुलिस प्रशासन द्वारा बिना नोटिस व बिना कारण बताए हाउस अरेस्ट कर उनके संवैधानिक एवं विशेषाधिकारों का खुला उल्लंघन किया गया। उन्होंने ने कहा न केवल उनके निवास स्थान पर सीमित किया गया बल्कि उनके दैनिक जनसंपर्क/निरीक्षण और जनता के मुद्दों पर हस्तक्षेप जैसे कर्तव्य में भी बाधा डाली गई। यह कृत्य न केवल एक जनप्रतिनिधि के प्रति अन्याय है बल्कि समूचे लोकतांत्रिक ढांचे और जनता के अधिकारों पर सीधा हमला है।

सांसद ने यह भी कहा कि स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब पुलिस कर्मियों द्वारा जनता के एक प्रतिनिधि को उनके वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन से जबरन रोका गया यह व्यवहार न सिर्फ अनुचित है बल्कि लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा की पुलिस द्वारा अंजाम दी गई यह घटना धारा 221 बी एन एस धारा 126 बी एन एस धारा 115 बी एन एस धारा 351 बी एन एस धारा 352 बी एन एस का घोर उलंघन है।
खैर, प्रशासन पुलिस और सांसद के बीच द्विपक्षीय वार्ता में प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम मे अपनी गलती स्वीकार की और प्रशासन की तरफ से ऐसी दोबारा चूक नही होगी और इस चूक के जिम्मेदारो पर कार्रवाई भी होगी। जिसके बाद सांसद राकेश राठौर संतुष्ट दिखाई दिये और आमरण अनशन समाप्त की घोषणा की।

अनशन खत्म होने के बाद कि सुखद तस्वीरें, सांसद राकेश राठौर के साथ नाश्ता करते ASP, SDM, CO व सिटी मजिस्ट्रेट एवं साथ मे मौजूद सपा नेता अनूप गुप्ता इसी बीच समय समय पर सांसद राकेश राठौर की डॉक्टरी भी होती रही सुगर बीपी की जाँच होती रही सुबह उनका ब्लड सैम्पल भी जाँच के लिए भेजा गया। सुबह उनका बीपी कुछ बढ़ा हुआ निकला था। आपको बता दें कि सांसद राकेश राठौर शुगर और बीपी की दवा भी खाते हैं।

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