CM Yogi adityanath ने ‘सन्त कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना’ के अन्तर्गत राज्य स्तर पर चयनित बुनकरों को किया सम्मानित

  • झलकारी बाई कोरी हथकरघा एवं पावरलूम विकास योजना के लाभार्थियों को मुख्यमंत्री ने दिए चेक
  • जब हम स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करेंगे, तो हस्तशिल्पियों के चेहरे पर खुशहाली तथा उनके जीवन में समृद्धि आएगी : CM योगी

लखनऊ (पंच पथ न्यूज़)। प्रदेश के हथकरघा उद्योग से जुड़े हस्तशिल्पियों एवं बुनकरों ने अपने कौशल एवं परिश्रम से भारत की विरासत को नई ऊचाइयों तक पहुंचाया है। प्रदेश सरकार हस्तशिल्पियों एवं बुनकरों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ केवल एक दिवस नहीं, बल्कि भारत के स्वाधीनता आन्दोलन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। 07 अगस्त, 1905 को भारत के स्वाधीनता आन्दोलन को नई दिशा मिली थी। इसी दिन आजादी के आन्दोलन में स्वदेशी की भावना ने पदार्पण किया था। स्वदेशी के मंत्र ने भारत को गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराने के संकल्प को आगे बढ़ाया था।
सीएम योगी ने शुक्रवार को ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह-2026’ के इस अवसर पर अपने विचार रखे।मुख्यमंत्री ने सन्त कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना के अन्तर्गत राज्य स्तर पर चयनित बुनकरों को सम्मानित किया तथा मुख्यमंत्री हथकरघा एवं पावरलूम उद्योग विकास योजना, झलकारी बाई कोरी हथकरघा एवं पावरलूम विकास योजना के लाभार्थियों को प्रतीकात्मक चेक प्रदान किये। इसके पूर्व, मुख्यमंत्री जी ने ओ0डी0ओ0पी0 उत्पादों तथा हथकरघा उद्योग पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष हथकरघा उत्पादों के प्रमुख क्रेताओं एवं संस्थागत भागीदारों-हैण्डलूम प्रमोशन एक्सपोर्ट काउंसिल चेन्नई, तनैरा बेंगलुरु, कारिगो डी0टी0डी0सी0, इन्टरनेशनल फैशन बिजनेस एक्सचेंज काउंसिल तथा फूल कानपुर के मध्य एम0ओ0यू0 का आदान-प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि महात्मा गांधी ने खादी, स्वदेशी तथा हथकरघा को आजादी के आन्दोलन का सबसे बड़ा शस्त्र बनाया था। स्वदेशी उत्पाद को नया जीवन देने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 07 अगस्त की तिथि को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। यह दिवस वर्ष 2015 से देश में प्रत्येक वर्ष मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री जी का यह निर्णय हथकरघा से जुड़े देश के लाखों उद्यमियों, व्यवसायियों तथा हस्तशिल्पियांं का सम्मान है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि स्वदेशी हमारी विरासत है। हमारे हस्तशिल्पी एवं हथकरघा उद्यमी बड़ी मेहनत एवं परिश्रम से अपना कार्य करते हैं। प्रदेश के 2.5 लाख परिवारों के 14-15 लाख लोग हथकरघा उद्योग से जुड़े हैं। पावरलूम को जोड़ देने पर यह संख्या बढ़कर लगभग 30 लाख हो जाती है। यह उद्योग 30 लाख लोगों की आजीविका तथा स्वावलम्बन का आधार है। इसके माध्यम से वह आत्मनिर्भरता के साथ निरन्तर आगे बढ़ रहे हैं।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश सरकार हस्तशिल्पियों व बुनकरों को प्रत्येक सुविधा सम्मानपूर्वक प्रदान कर रही है। लगभग 40,000 बुनकरों को मुख्यमंत्री हथकरघा उद्योग विकास योजना, झलकारी बाई कोरी हथकरघा एवं पावरलूम विकास योजना तथा विद्युत दर रियायत जैसी योजनाओं के माध्यम से 109 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध करयी गई है। आज का समय प्रतिस्पर्धा का है, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा में हम तब टिक पाएंगे, जब आज की मांग के अनुरूप डिजाइन तथा वस्त्र तैयार करेंगे। आज यहां लगायी गयी प्रदर्शनी बुनकरों एवं हस्तशिल्पियों के कौशल को प्रदर्शित करने का मंच व उत्पादों की ब्राण्डिंग का आधार है। यह मंच उत्पादों को बाजार से जोड़ने का माध्यम व लाखों लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ, मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा तथा बरेली आदि जनपदों के हस्तशिल्पी व कारीगर अपने उत्पादों के माध्यम से देश-दुनिया को आकर्षित कर रहे हैं। लखनऊ की चिकनकारी का काम अत्यन्त उत्कृष्ट है। व्यापारी और हस्तशिल्पी के बीच में विश्वास का रिश्ता होता है। बाराबंकी, अम्बेडकर नगर, संत कबीर नगर, गोरखपुर, मऊ, आजमगढ़, वाराणसी, भदोही, मीरजापुर आदि जनपदों के हस्तशिल्पियों के उत्पादों को वैश्विक मान्यता प्राप्त हुई है। भदोही का कालीन उद्योग वर्ष 2017 से पूर्व मृतप्राय हो गया था। आज वहां से सैकड़ों करोड़ रुपए का निर्यात हो रहा है। भदोही की कालीन दुनिया के बाजार में छा गई है। देश की नई संसद में जब कालीन बिछाने की बात आयी, तो प्रधानमंत्री जी ने भदोही की कालीन को प्राथमिकता दी। कालीन के माध्यम से संसद में उत्तर प्रदेश के कारीगरों का सम्मान हो रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि हथकरघा ऐसा क्षेत्र है, जिसमें 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं कार्य कर रही हैं। वर्ष 2017 के पश्चात हमने परम्परागत उद्यम को प्रोत्साहित किया। ‘एक जनपद एक उत्पाद योजना’ के माध्यम से उत्पादों की ब्राण्डिंग की गई। प्रधानमंत्री जी जब किसी देश के दौरे पर जाते हैं, तो वहां के राष्ट्राध्यक्ष को उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्पियों और कारीगरों द्वारा निर्मित उत्पाद को प्रदान करते हैं। यह हस्तशिल्पियों और कारीगरों का सम्मान है। प्रदेश में 96 लाख एम0एस0एम0ई0 इकाईयां कार्य कर रही हैं। हथकरघा प्रदेश में सबसे बड़ा कुटीर उद्योग है। सभी एम0एस0एम0ई0 उत्पादों का रजिस्ट्रेशन करने के साथ ही प्रत्येक एम0एस0एम0ई0 इकाई को 05 लाख रुपये का सुरक्षा बीमा का कवर उपलब्ध कराया जाता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हथकरघा विभाग हस्तशिल्पियों और कारीगरों द्वारा निर्मित उत्पादों को बाजार की मांग के अनुसार टेक्नोलॉजी, डिजाइनिंग आदि से जोड़े। प्रदेश सरकार ने हस्तशिल्पियों व कारीगरों को विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और पी0एम0 विश्वकर्मा योजना के माध्यम से टूलकिट तथा ट्रेनिंग प्रदान करने की व्यवस्था की है। इस क्षेत्र में कुछ नया करने वाले लोगों को आज यहां संत कबीर हथकरघा पुरस्कार योजना से सम्मानित किया गया है। दीपावली, होली तथा ईद आदि त्योहारों पर हमें प्रदेश के कारीगरों और हस्तशिल्पियों द्वारा निर्मित उत्पाद को अपने सगे-सम्बन्धियों को गिफ्ट के रूप में उपलब्ध कराना चाहिए। इन उपहारों में भदोही की कालीन, फिरोजाबाद की मूर्ति, मुरादाबाद की पीतल की वस्तु तथा मेरठ का खेल का सामान आदि हो सकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज मेरठ स्पोर्ट्स आइटम का केन्द्र बिन्दु बना है। वर्ष 2017 से पूर्व पहले यह उद्योग दम तोड़ रहा था। भट्टियों में पारम्परिक ईंधन प्रयोग करने से पर्यावरण प्रदूषित होता था। आज प्रदेश सरकार वहां पी0एन0जी0 पाइप लाइन पहुंचा दी है। बिजली के कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। उत्पादों को टेक्नोलॉजी तथा पैकेजिंग आदि से जोड़ा गया है। उन्हें निर्यात हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने सरकारी विभागों में हथकरघा से जुड़े उत्पाद को खरीदने की व्यवस्था बनाई है। विभाग तत्काल इस पर कार्यवाही आगे बढ़ाए। अस्पतालों तथा गेस्टहाउस में स्थानीय हस्तशिल्पियों तथा कारीगरों द्वारा निर्मित बेडशीट तथा तौलिए आदि के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी। उत्पादों की ब्राण्डिंग का अवसर मिलेगा।
हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री श्री राकेश सचान ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्ष पुरानी बुनकर परम्परा तथा स्वदेशी अवधारणा को सम्मान प्रदान करने का उत्सव है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार हथकरघा उद्योग को निरन्तर प्रोत्साहित कर रही है। हस्तशिल्पियों एवं कारीगरों को शासन की योजनाओं का लाभ प्रदान किया जा रहा है। उत्पादों को ब्राण्डिंग, तकनीक, पैकेजिंग तथा मार्केट आदि से जोड़ा जा रहा है। उत्सवों और त्योहारों आदि पर हमें प्रदेश के बुनकरों और हस्तशिल्पियों द्वारा निर्मित उत्पादों की खरीद को प्राथमिकता देनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान हथकरघा उद्योग की उपलब्धियों पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गई तथा मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जी द्वारा हथकरघा दिवस पर दिये गए संदेश का प्रसारण किया गया।
इस अवसर पर विधान परिषद सदस्य श्री मुकेश शर्मा, डॉ0 लालजी प्रसाद निर्मल, विधायक श्रीमती जयदेवी, श्री नीरज बोरा, लखनऊ की महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त श्री दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री अवनीश कुमार अवस्थी, प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग श्री अनिल कुमार सागर, आयुक्त एवं निदेशक हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग श्री के0 विजयेन्द्र पांडियन सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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