
- पश्चिम से पूर्व तक सत्ता की लड़ाई, बीजेपी के गढ़ में सपा की दस्तक
- 11 महीने पहले चुनावी मैदान में अखिलेश, कमज़ोर क़िले से बड़ा दांव
रेहान अंसारी
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी तैयारियों को औपचारिक रूप से धार देना शुरू कर दिया है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव श्रीराम नवमी के अगले दिन मिशन-2027 का श्रीगणेश कर सकते हैं। इस चुनावी अभियान की शुरुआत पश्चिमी यूपी से होगी और पहला पड़ाव होगा नोएडा।
सूत्रों के मुताबिक, 28 मार्च को अखिलेश यादव नोएडा में PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) भागीदारी रैली को संबोधित करेंगे। इसी रैली के ज़रिये सपा 2027 विधानसभा चुनाव के लिए अपने PDA फ़ॉर्मूले का औपचारिक ऐलान भी करेगी। खास बात यह है कि अखिलेश यादव लगभग 11 महीने पहले ही चुनावी कैंपेन शुरू कर रहे हैं, जो सपा की आक्रामक रणनीति की ओर इशारा करता है।
नोएडा और गौतमबुद्धनगर ज़िला सपा के लिए बीते चुनावों में सबसे कमज़ोर क्षेत्रों में रहा है। 2022 विधानसभा चुनाव में इस ज़िले की सभी सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी और सपा को एक भी सीट नहीं मिली थी। यही वजह है कि अखिलेश यादव ने कमजोर इलाकों पर सीधा फोकस करते हुए वहीं से चुनावी प्रचार की शुरुआत करने का फ़ैसला किया है।
पार्टी सूत्र बताते हैं कि अखिलेश यादव इस बार टिकट वितरण को लेकर बेहद सख़्त रुख अपनाए हुए हैं। मठाधीशों या सिफ़ारिशों के आधार पर टिकट देने से साफ इनकार कर दिया गया है। कई बड़े नेताओं को यह स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि मेरिट से कोई समझौता नहीं होगा। इसी कारण टिकट की पैरवी करने वालों को भारी निराशा का सामना करना पड़ रहा है।
सपा नेतृत्व का मानना है कि 2027 की लड़ाई ज़मीन पर मज़बूत संगठन, सामाजिक समीकरण और विश्वसनीय उम्मीदवारों के दम पर ही जीती जा सकती है। अखिलेश यादव का रुख 2027 को लेकर बिल्कुल साफ है—कमज़ोर सीटों पर मज़बूत पकड़, समय से पहले मैदान में उतरना और संगठन को बूथ स्तर तक मज़बूत करना।
नोएडा से शुरू होने वाला यह अभियान न सिर्फ पश्चिमी यूपी, बल्कि पूरे प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है। अब नज़रें 28 मार्च की PDA भागीदारी रैली पर टिकी हैं, जहां से सपा अपने 2027 के चुनावी रोडमैप को पूरी तरह सार्वजनिक करेगी।



