मनरेगा बचाने को मजदूरों का जोरदार प्रदर्शन, नए कानून के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों

  • काली पट्टी–तसला लेकर मजदूरों का ऐलान, “मनरेगा से छेड़छाड़ नहीं सहेंगे”

सीतापुर (पंच पथ न्यूज़)। मनरेगा के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जिले में ग्रामीण मजदूरों ने प्रस्तावित “विकसित ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (ग्रामीण)” के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। संगतिन किसान मजदूर संगठन (एसकेएमएस) के नेतृत्व में निकली इस रैली में हजारों मजदूरों ने भाग लेकर सरकार के नए कानून के प्रति गहरी नाराजगी जाहिर की।

कांशीराम कॉलोनी के पास मजदूरों ने एकत्र होकर जनसभा की, जिसके बाद रैली की शुरुआत हुई। रैली लालबाग चौराहा होते हुए आंख अस्पताल स्थित गांधी पार्क पहुंची, जहां महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद रैली म्युनिसिपल मार्केट स्थित आंबेडकर पार्क पहुंची और डॉ. भीमराव आंबेडकर को नमन किया गया। अंत में प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने माथे पर काली पट्टी बांधकर और सिर पर मिट्टी का तसला रखकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। मजदूरों का कहना था कि प्रस्तावित नया कानून मनरेगा की मूल आत्मा और अधिकार आधारित ढांचे को कमजोर कर देगा। वर्तमान मनरेगा कानून में काम मांगने पर रोजगार का अधिकार सुनिश्चित है, जबकि नए कानून में रोजगार को बजट आधारित करने का प्रावधान किया जा रहा है, जिससे मजदूरों के अधिकार प्रभावित होंगे।

वक्ताओं ने बताया कि मौजूदा व्यवस्था में मनरेगा का खर्च केंद्र और राज्य सरकार के बीच 90:10 के अनुपात में होता है, जबकि नए कानून में इसे 60:40 करने का प्रस्ताव है। इससे राज्य सरकारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा और ग्रामीण मजदूरों को समय पर रोजगार मिलने में बाधा आ सकती है।
सभा में यह भी कहा गया कि पिछले 20 वर्षों में मनरेगा ने ग्रामीण मजदूरों, महिलाओं और भूमिहीन परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। 100 दिन के रोजगार की गारंटी, न्यूनतम मजदूरी और बेरोजगारी भत्ता जैसी व्यवस्थाओं ने करोड़ों परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की। कोरोना काल और लॉकडाउन के दौरान यह योजना ग्रामीण भारत के लिए जीवन रेखा साबित हुई।
मजदूरों ने केंद्रीय बजट में मनरेगा के लिए प्रस्तावित राशि को अपर्याप्त बताते हुए सरकार के 125 दिन रोजगार देने के दावे पर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मनरेगा के नाम, उद्देश्य और मूल स्वरूप में किसी तरह की छेड़छाड़ न की जाए और प्रस्तावित नए कानून को तत्काल वापस लिया जाए।
ज्ञापन सौंपने वालों में ऋचा सिंह, रामबेटी, कौसर जहां, बिटोली, जमुना, जगन्नाथ, रामकिशोर, प्रकाश, पिंटू, साकरून, जसना, सुदामा, केश्काली, सुरेश, रामदेवी, राजराम, पप्पू, विद्यासागर, कुंती, रेशमा, दुर्गेश, रामसरन, सीता, रोशन, मंगूलाल, शांति, रामसेवक, उत्तम और राजेश सहित कई मजदूर नेता व कार्यकर्ता शामिल रहे।

Related Articles

Back to top button