
- AIMIM को बड़ा झटका? कांग्रेस के संपर्क में आसिम वकार की चर्चा, जानिए कौन हैं ओवैसी के करीबी नेता
रेहान अंसारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद आसिम वकार को लेकर चर्चा है कि वह जल्द ही पार्टी से दूरी बनाकर कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक आसिम वकार या कांग्रेस की ओर से उनके दल बदलने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक गलियारों में चल रही अटकल के तौर पर ही देखा जा रहा है।
सियासी गलियारों में चर्चा यह भी है कि AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वक़ार अगले सप्ताह कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं और खबर यह भी है कि उनकी जॉइनिंग दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व में होगी और इसी दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की जा सकती है।

कौन हैं सैयद आसिम वकार? आसिम वक़ार का सियासी सफ़र नया नहीं है। उनकी राजनीति की शुरुआत समाजवादी पार्टी से हुई थी और वह मुलायम सिंह यादव के दौर से सक्रिय राजनीति में रहे हैं। बाद में उन्होंने AIMIM का दामन थामा और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर अपनी पहचान बनाई। सैयद आसिम वकार लंबे समय से AIMIM के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। उन्होंने करीब 2017 में AIMIM का दामन थामा था वह राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर टीवी डिबेट और राजनीतिक मंचों पर AIMIM का मज़बूती से पक्ष रखते रहे हैं। उन्हें AIMIM का राष्ट्रीय प्रवक्ता और पश्चिम बंगाल का पार्टी प्रभारी भी बनाया जा चुका है। सैयद आसिम वक़ार अपने बेबाक अंदाज़ के लिए भी जाने जाते हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें AIMIM का उत्तर प्रदेश प्रभारी भी बनाया गया था। उस दौरान उन्होंने ओवैसी की पार्टी के चुनावी विस्तार और गठबंधन की संभावनाओं को लेकर लगातार बयान दिए थे।
आसिम वकार की पहचान सिर्फ पार्टी संगठन तक सीमित नहीं रही। वह अल्पसंख्यक अधिकारों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय पर मुखरता से अपनी बात रखते रहे हैं।

फिर कांग्रेस में जाने की चर्चा क्यों?
आसिम वकार के संभावित कांग्रेस प्रवेश की चर्चा ऐसे समय शुरू हुई है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि AIMIM के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हाजी शौकत अली से अनबन होने के कारण वह यह फैसला ले सकते हैं। उनके कांग्रेस में जाने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं को प्रमुखता दी है।
इस चर्चा को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वकार AIMIM के राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले प्रवक्ताओं में रहे हैं। यदि वह वास्तव में कांग्रेस में जाते हैं तो यह केवल एक नेता का दल-बदल नहीं होगा, बल्कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व और विपक्षी राजनीति के बदलते समीकरणों के लिहाज से भी इसे देखा जाएगा।

चर्चा के पीछे क्या हो सकता है? चर्चा यह भी है कि कांग्रेस में शामिल होने के बाद आसिम वक़ार को उत्तर प्रदेश में अहम ज़िम्मेदारी दी जा सकती है। मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व: आसिम वकार लंबे समय से मुस्लिम राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व के मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस में उनकी संभावित एंट्री को इस वर्ग के बीच पार्टी की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या वकार और AIMIM के बीच सब कुछ ठीक नहीं है?
यह सवाल भी अब राजनीतिक चर्चा का हिस्सा है। हालांकि, किसी गंभीर मतभेद या पार्टी छोड़ने की ठोस वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि वकार AIMIM नेतृत्व से नाराज होकर कांग्रेस में जा रहे हैं।

इतना जरूर है कि उनके हालिया राजनीतिक बयानों और सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर डालने पर कांग्रेस से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता दिखाई देती है। उनके आधिकारिक सोशल मीडिया प्रोफाइल पर हालिया पोस्टों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संदर्भ में भी सकारात्मक टिप्पणी नजर आती है।
अगर कांग्रेस में गए तो क्या होगा असर?
आसिम वकार के कांग्रेस में शामिल होने की स्थिति में सबसे बड़ा सवाल उत्तर प्रदेश की सियासत खासकर मुस्लिम वोटों को लेकर चल रही सियासी खींचतान के बीच यह अहम राजनीतिक घटनाक्रम होगा। कांग्रेस पहले से ही यूपी में विपक्षी राजनीति को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में AIMIM के एक चर्चित मुस्लिम राष्ट्रीय प्रवक्ता जो मुसलमानों को लिए बेबाकी से आवाज़ उठाता है उसका कांग्रेस के साथ आना पार्टी के लिए राजनीतिक और प्रतीकात्मक, दोनों तरह से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
फिलहाल क्या है सच्चाई?
आसिम वकार के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा जरूर तेज है, लेकिन अभी इसे पक्की खबर नहीं कहा जा सकता। न तो कांग्रेस की ओर से उनके स्वागत की आधिकारिक घोषणा सामने आई है और न ही आसिम वकार ने सार्वजनिक रूप से AIMIM छोड़ने का ऐलान किया है।
इसलिए फिलहाल राजनीतिक गलियारों में सवाल यही है—
क्या AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वकार वाकई ओवैसी का साथ छोड़कर कांग्रेस के हाथ को थामेंगे, या यह सिर्फ चुनावी मौसम में उठी एक राजनीतिक अटकल है? फिलहाल वकार का कोई बयान या कांग्रेस की ओर से आधिकारिक घोषणा इस पूरे मामले की तस्वीर साफ कर सकती है। आधिकारिक ऐलान का इंतज़ार है



