नेशनलिस्ट क़ौम कहा था इंदिरा गांधी ने अंसारी बिरादरी को

सुहेल वहीद
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बात उन दिनों की है जब इंदिरा गांधी थोड़ा संकट की स्थिति में थीं और लगभग ख़ुफ़िया ढंग से सीतापुर आईं थीं। सन 1978 की बात है जब वह सीतापुर में सिंचाई विभाग के सर्किट हाउस में कुछ घंटों के लिए रुकी थीं।डॉ0 तब उनसे मिलने वालों में डॉक्टर अम्मार रिज़वी, डॉक्टर फ़िदा हुसैन अंसारी, रम्पा टॉकीज़ के मालिक कृष्णा प्रसाद श्रीवास्तव उर्फ़ किशन मैनेजर, नगर पालिका के तत्कालीन चेयरमैन कृष्ण चंद्र गुप्ता उर्फ़ कृष्णा बाबू और विधायक ओम प्रकाश गुप्ता थे। इन लोगों के अलावा रम्पा रोड पर हिंदुस्तान फोटोग्राफर के इक़बाल खां भी थे। इंदिरा गांधी को सीतापुर से लखीमपुर जाना था, वह कुछ देर सर्किट हाउस में रुकीं और इन पांच लोगों से मुलाक़ात करके लखीमपुर चली गईं।

डॉक्टर फिदा हुसैन, डॉक्टर अम्मार रिज़वी (फ़ाइल फ़ोटो)

डॉक्टर फ़िदा हुसैन अंसारी ने उस मुलाक़ात को याद करते हुए आज बताया कि क्या शानदार शख़्सियत की मालिक थीं इंदिरा जी। वह बताते हैं कि अम्मार रिज़वी साहब ने जब उनका तार्रुफ यह कहते हुए कराया कि डॉक्टर फ़िदा हुसैन लखनऊ के शिया कॉलेज में कामर्स के विभागाध्यक्ष हैं तो उन्होंने ताइज्जुब का इज़हार करते हुए कहा “सो यंग” । डॉक्टर फ़िदा हुसैन बताते हैं कि डॉक्टर अम्मार रिज़वी ने ही उनको वहाँ नियुक्त किया था क्योंकि वह अपने बैच के टॉपर थे। फ़िदा हुसैन बताते हैं कि जब उन्होंने इस तरह हमारी तारीफ़ की तो हमें बड़े गर्व का एहसास हुआ। फिर इंदिरा जी ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि गांधी जी भी कहते थे और हमने जवाहर लाल जी से भी सुना है कि वह कहते थे कि अंसारी बिरादरी तो नेशनलिस्ट क़ौम है।
डॉक्टर फ़िदा हुसैन अंसारी उन यादों को बड़ी शान से याद करते हुए बताते हैं कि इंदिरा जी ने जब यह बात कही तो उनकी ऑंखों में चमक थी। उस मुलाक़ात में थोड़ी देर तक और दूसरे विषयों पर बात हुई, फिर वह लखीमपुर चली गईं। डॉक्टर अंसारी बताते हैं कि लखीमपुर से वापसी पर थोड़ी देर वह फिर सर्किट हाउस में रुकीं और तब तक टायर हाउस वाले चोपड़ा जी के घर पर इंदिरा जी के लिए खाना तैयार हो गया था। वह खाना टिफ़िन में पैक कर के उनकी गाड़ी में रख दिया गया और वह वापस चली गईं।
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