मशहूर हास्य कवि महफ़ूजुर्रहमान महफ़ूज़ रहमानी का निधन, साहित्यिक जगत में शोक की लहर

  • मदरसा अरबिया सिटी स्टेशन सीतापुर में कल सुबह 9 बजे होगी नमाज़े जनाजा बड़े तालाब कब्रिस्तान में किया जायेगा सुपुर्द-ए-खाक

सीतापुर (पंच पथ न्यूज़)। उर्दू साहित्य के हास्य-व्यंग्य जगत के चमकते सितारे और जाने-माने कवि जनाब महफ़ूज़ उर रहमान ख़ान महफ़ूज़ रहमानी साहब का निधन हो गया है। वह जमीयत उलेमा सीतापुर के अध्यक्ष और मशहूर शायर व पत्रकार जनाब मस्त हफ़ीज़ रहमानी के सबसे छोटे भाई और लेखक व शायर व सामाजिक कार्यकर्ता खुश्तर रहमानी के सगे चाचा थे। उनके निधन की खबर फैलते ही साहित्यिक, सामाजिक और आम लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में शुभचिंतकों और शहर के गणमान्य लोगों ने उनके आवास पर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की।
जनाब महफ़ूज़ रहमानी साहब की गिनती उत्तर प्रदेश और देश के गिने-चुने हास्य और व्यंग्य कवियों में होती थी। उन्होंने अपनी अनोखी शायरी के ज़रिए सामाजिक बुराइयों पर करारा तंज किया और आम इंसान के जज्बातों को बेहद खूबसूरत अंदाज़ में पेश किया। अब तक उनकी 5 काव्य पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें विद्वानों ने खूब सराहा। इनमें मियां मिट्ठू, बेजोड़ दीवान, बिसात ख़ाना, तबर्रुक और कोह-ए-क़तात शामिल हैं। साहित्यिक हलकों के लिए यह बेहद भावुक और दुखद बात है कि उनकी पांचवीं किताब कोह-ए-क़तात का विमोचन अभी हाल ही में पिछले 31 मई 2026 को बहुत बड़े पैमाने पर हुआ था, जहां जानकारों ने उनकी साहित्यिक सेवाओं की जमकर तारीफ की थी। कोई नहीं जानता था कि यह किताब उनके जीवन की आखिरी निशानी साबित होगी।
महफ़ूज़ रहमानी साहब के चले जाने से रहमानी परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में यह तीसरा बड़ा झटका है। अभी हाल ही में पिछले 22 दिसंबर 2025 को उनके बड़े भाई ज़िया रहमानी का निधन हुआ था, और अभी 7 जून को ही परिवार के एक होनहार युवा पत्रकार कमरुल हक़ ख़ान भी इस दुनिया से रुखसत हो गए थे। ये दोनों ही बज़्म-ए-उर्दू के सक्रिय सदस्य और समर्पित कार्यकर्ता थे। अभी परिवार इन गहरे सदमों से उबर भी नहीं पाया था कि महफ़ूज़ रहमानी साहब के निधन ने पूरे परिवार और चाहने वालों को झकझोर कर रख दिया है।
वह अपने पीछे पत्नी (बेवा) के अलावा चार बेटे, तीन बेटियां और नाती-पोतों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके भतीजे खुश्तर रहमानी के अनुसार, दिवंगत की जनाज़े की नमाज़ कल सुबह ठीक 9.00 बजे मदरसा अरबिया, सिटी स्टेशन, सीतापुर के परिसर में अदा की जाएगी, जिसके तुरंत बाद सिटी स्टेशन के पास स्थित बड़े तालाब कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक (दफन) किया जाएगा।
जनाब मस्त हफ़ीज़ रहमानी, खुश्तर रहमानी और पूरे परिवार ने सभी विद्वानों, मित्रों और शुभचिंतकों से जनाज़े में शामिल होने और मरहूम की आत्मशांति व मगफ़िरत (मोक्ष) के लिए दुआ की अपील की है।

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