
सीतापुर। जमीअत उलमा की सीतापुर इकाई ने जिलाधिकारी को एक पत्र देते हुए कहा जमातुल विदा (अलविदा) यानी रमज़ान का आखिरी जुमे के दिन बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा परिषदीय विद्यालयों में शुक्रवार को परीक्षा कैसे रखी जा सकती है जब कि उस दिन स्थानीय अवकाश है।
जमीअत उलमा सीतापुर का यह भी कहना है कि जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी अवकाश तालिका में जिलाधिकारी के आदेश के मुताबिक पवित्र रमज़ान के आखिरी जुमा (शुक्रवार) को स्थानीय अवकाश घोषित किया गया है यह अवकाश कोषागार एंव उपकोषागार को छोड़ कर जनपद सभी विभागों पर समान रूप से लागू होता है बावजूद इसके बेसिक शिक्षा विभाग सीतापुर इस दिन परिषदीय विद्यालयों में परीक्षा कैसे रख सकता है ? ऐसे में सवाल यह भी खड़ा होता है कि क्या बेसिक शिक्षा विभाग सीतापुर को इसकी जानकारी नहीं है ? यह फिर जानबूझ कर अनजान बना हुआ है ?
जमीअत उलमा के ज़िला अध्यक्ष मस्त हफ़ीज़ रहमानी का कहना है कि रमज़ान का आखरी जुमा (शुक्रवार) का मुस्लिम समुदाय में विशेष महत्व है। इस रोज अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय द्वारा सदैव से ही परम्परागत रूप से इबादत की जाती है और मुल्क में अम्न-ओ-चैन व खुशहाली की दुआएँ की जाती है।
लेकिन यह खेद का विषय है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी, सीतापुर कार्यालय से जारी पत्रांक 28420-25/2024-25 दिनाँक 21 मार्च 2025 द्वारा वार्षिक परीक्षा कार्यक्रम में 28 मार्च 2025 (शुक्रवार) स्थानीय अवकाश के दिन भी परीक्षा कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है, जोकि पूर्णतः अनुचित व अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के शिक्षकों एवं छात्रों को विचलित करने वाला है।
यदि 28 मार्च 2025 (शुक्रवार) को स्थानीय अवकाश के दिन परीक्षा कार्यक्रम यथावत रहता है तो हजारों-हजार अल्पसंख्यक मुस्लिम छात्र परीक्षा देने से वंचित हो सकते हैं, जिसका उनके अमुल्य जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही शिक्षकों को भी विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
जमीअत उलमा सीतापुर ने जिलाधिकारी से माँग की है 28 मार्च 2025 (शुक्रवार) को स्थानीय अवकाश के दिन कराई जा रही परिषदीय परीक्षा को निरस्त कर अन्य दिवस में कराने हेतु अपने स्तर से प्रभावी आदेश जारी कर अन्य विभागों के समान बेसिक शिक्षा परिषद के समस्त शिक्षकों कर्मचारियों को भी स्थानीय अवकाश का लाभ दिया जाए।