बज़्म-ए-उर्दू के तहत शानदार शेरी महफिल और सम्मान समारोह

  • मशहूर शायर हाफिज़ वसीम जहांगीराबादी, यूपीएससी के कामयाब नौजवान अबूज़र अंसारी और आफाक़ हुसैन का स्वागत और सम्मान

सीतापुर (पंच पथ न्यूज़)। बीती रात बज़्म-ए-उर्दू सीतापुर की तरफ से एक बड़ी और शानदार अदबी महफिल (शेरी नशिस्त) का आयोजन किया गया। यह प्रोग्राम मशहूर शायर हाफिज़ वसीम जहांगीराबादी के दिल्ली से आने की खुशी में बज़्म के अध्यक्ष मस्त हफीज़ रहमानी के घर पर हुआ। यह शाम न सिर्फ शायरी के नाम रही बल्कि इसमें पढ़ाई और समाज सेवा के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की भी जमकर हौसला-अफज़ाई की गई।

आफाक हुसैन को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान करते मस्त हफ़ीज़ रहमानी व अन्य

प्रोग्राम के दौरान बज़्म-ए-उर्दू के अध्यक्ष मस्त हफीज़ रहमानी ने दिल्ली से आए खास मेहमान हाफिज़ वसीम जहांगीराबादी, यूपीएससी में बड़ी कामयाबी पाने वाले होनहार नौजवान अबूज़र अंसारी और उर्दू को बढ़ावा देने के लिए काम करने वाले आफाक़ हुसैन को यादगारी निशान (स्मृति चिन्ह), बज़्म की खास शाल और गुलदस्ता देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मस्त हफीज़ रहमानी ने मेहमानों की मेहनत और काम की तारीफ की।

महफिल में शायरों ने अपनी शायरी से सुनने वालों का दिल जीत लिया। महफिल में पढ़े गए कुछ चुने हुए शेर नीचे दिए गए हैं –

सब के हाथों में नया इक साज़ है
मेरा चुप रहना भी इक आवाज़ है
मस्त हफीज़ रहमानी

यह कह के मेरे क़त्ल का फिर हुक्म हो गया
मज़लूम की अपील की मुद्दत निकल गई
मिर्ज़ा शारिक़ लहरपुरी

जब कभी ज़ुल्म-ओ-तशद्दुद के अंधेरे फैले
मैंने खुर्शीद-ए-अमां ला के ज़मीं पर रखा
हाफिज़ वसीम जहांगीराबादी

शमअें ले ले अंधेरों में निकल पड़ते हैं
तेरे सूरज से तो अच्छे हैं हमारे जुगनू
डॉ. अख़लाक़ सीतापुरी

तलवार से मारोगे तो कहलाओगे क़ातिल
नज़रों से करो क़त्ल सज़ा कुछ भी नहीं है
डॉ. अज़हर खैराबादी

दोहराना ज़रा बात समझ में नहीं आई
यह तुमने मिरे कान में चुपके से कहा क्या
खुश्तर रहमानी

अंधेरा भी ज़रूरी है उजाला भी ज़रूरी है
जहान-ए-खैर-ओ-शर में तमाशा भी ज़रूरी है
महबूब खैराबादी

इश्क़ में ऐन है शीन है क़ाफ़ है
ये समझने में हम को ज़माने लगे
इलियास चिश्ती

इस महफिल में सीतापुर शहर और आसपास के लगभग 21 शायरों ने अपनी शायरी पेश की। शामिल होने वालों में रिज़वान अली खां, इश्तियाक़ अली सबा बाराबंकवी, नदीम सीतापुरी, कौसर रिज़वी, अतहर रिज़वी, बशर हरगांवी, क़ारी आज़म, आज़म खैराबादी, नूर खैराबादी, रियाज़ सीतापुरी, कैफी चिश्ती, अफ़ज़ल यूसुफ और दूसरी बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। प्रोग्राम को कामयाब बनाने में अबूज़र नोमान और अनज़र हस्सान ने अच्छा साथ दिया। प्रोग्राम का संचालन (स्टेज मैनेजमेंट) नौजवान पत्रकार और शायर यासीन इब्ने उमर ने अपने खास अंदाज में बहुत खूबसूरती से किया। आखिर में बज़्म-ए-उर्दू के कन्वीनर खुश्तर रहमानी ने सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया और जल्द ही एक और शानदार प्रोग्राम करने का ऐलान किया।

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