Sitapur नजूल भूमि मामलों में पारदर्शिता की मांग, अधिवक्ताओं ने प्रशासन के सामने रखी 8 प्रमुख मांगें

  • नागरिकों में भय का वातावरण समाप्त हो : आशीष मिश्रा
  • नजूल भूमि पर उठे बड़े सवाल, अधिवक्ताओं ने प्रशासन से मांगी पारदर्शी नीति

सीतापुर (पंच पथ न्यूज़)। शहर की नजूल भूमि, नागरिकों के वैध अधिकारों और नगर पालिका की संवैधानिक भूमिका को लेकर गुरुवार को अधिवक्ताओं एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि जनहित और कानून से जुड़े गंभीर मुद्दों को सामने लाना है।प्रेस वार्ता में कहा गया कि सीतापुर नगर का बड़ा हिस्सा नजूल भूमि पर बसा हुआ है। हाल के दिनों में नजूल भूमि से संबंधित प्रशासनिक कार्रवाइयों के बाद पुराने पट्टाधारकों, शिक्षण संस्थानों, धार्मिक संस्थाओं और व्यापारियों के बीच असमंजस और असुरक्षा की स्थिति बनी है। अधिवक्ताओं ने कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का वे समर्थन करते हैं, लेकिन अवैध कब्जाधारियों और दशकों से वैध पट्टे या सरकारी अनुदान के आधार पर रह रहे लोगों के साथ समान व्यवहार उचित नहीं है।वक्ताओं ने कहा कि नजूल भूमि का इतिहास जटिल है और प्रत्येक भूखंड की स्थिति उसके मूल अभिलेखों, नजूल रजिस्टर, ग्रांट और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर तय होती है। उन्होंने कहा कि सीतापुर मिशन स्कूल, खैराबाद और अन्य मामलों ने कई महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न खड़े किए हैं, जिन पर न्यायालय में विचार चल रहा है। ऐसे में भविष्य की सभी प्रशासनिक कार्रवाइयां संविधान, कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए।
प्रेस वार्ता में 74वें संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा गया कि नगर पालिका परिषद केवल प्रशासनिक संस्था नहीं, बल्कि एक संवैधानिक संस्था है। इसलिए उससे पारदर्शिता, जवाबदेही और विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने की अपेक्षा की जाती है।इस दौरान अधिवक्ताओं ने जिला प्रशासन के समक्ष आठ सूत्रीय मांगपत्र भी रखा। इसमें नजूल भूमि के मूल अभिलेख और रजिस्टर सार्वजनिक करने, भूमि के विधिक अभिरक्षक (कस्टोडियन) की स्थिति स्पष्ट करने, पुराने पट्टों के नवीनीकरण और पुनर्ग्रहण की नीति सार्वजनिक करने, नजूल भूमि पर स्पष्ट लिखित नीति जारी करने, ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने तथा ऐतिहासिक प्लाइवुड फैक्ट्री की भूमि से जुड़े कर्मचारियों के बकाया और पुनर्वास की स्पष्ट कार्ययोजना घोषित करने की मांग की गई।
प्रेस वार्ता में अधिवक्ताओं ने कहा कि वे किसी वैध सरकारी कार्रवाई का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि अवैध अतिक्रमण हटाया जाए, लेकिन वैध पट्टाधारकों के अधिकारों की रक्षा हो, सभी कार्रवाई कानून के अनुसार की जाए और नागरिकों में भय व भ्रम की स्थिति समाप्त करने के लिए प्रशासन पारदर्शी नीति अपनाए।
अंत में अधिवक्ता आशीष मिश्रा एवं अन्य प्रबुद्ध नागरिकों ने कहा कि लोकतंत्र में ‘रूल ऑफ लॉ’ (विधि का शासन) सर्वोपरि है और नागरिकों के घर, संपत्ति तथा वैध अधिकारों से जुड़ी किसी भी कार्रवाई में कानून, संविधान और मानवीय प्रक्रिया का पूर्ण पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से संवाद और पारदर्शिता के माध्यम से नजूल भूमि से जुड़े विवादों का समाधान निकालने की अपील की।

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