Sitapur : तंबौर की Masjid पर हाईकोर्ट का स्टे बरकरार, फिर भी जारी हुआ हटाने का नोटिस

  • 4 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह बाद की अगली तारीख दी, मस्जिद कमेटी ने प्रशासन को भेजे न्यायालय के दस्तावेज

सीतापुर (पंच पथ न्यूज़)। लहरपुर तहसील क्षेत्र के तंबौर स्थित मदरसा मस्जिद जियाउल उलूम को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। मस्जिद और उससे संबंधित निर्माण को लेकर फरवरी 2026 से हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है। मस्जिद कमेटी के मुताबिक, 4 अक्टूबर 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पूर्व में दिए गए स्टे को बरकरार रखते हुए तीन सप्ताह बाद की अगली तारीख निर्धारित की। हालांकि, इसके अगले ही दिन यानी 5 अक्टूबर को लहरपुर तहसील प्रशासन की ओर से नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर कब्रिस्तान की जमीन पर बनी दुकानों और उनके ऊपर निर्मित मस्जिद को हटाने का निर्देश दिया गया।

मस्जिद कमेटी की पहली प्रेस वार्ता

मस्जिद कमेटी का कहना है कि प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किए जाने से पहले न्यायालय में हुई सुनवाई और स्टे की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी था। नोटिस जारी होने के बाद मस्जिद कमेटी ने प्रेस वार्ता कर अपना पक्ष रखा। कमेटी ने बताया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अगली सुनवाई 5 नवंबर को होनी है। कमेटी ने स्पष्ट किया कि न्यायालय जो भी फैसला सुनाएगा, उसका पालन किया जाएगा, लेकिन न्यायालय के आदेश की स्थिति स्पष्ट होने तक मस्जिद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

तहसीलदार लहरपुर ने दिया बयान

तहसीलदार ने वीडियो जारी कर बताया प्रशासन का पक्ष
दूसरी ओर, तहसीलदार लहरपुर की ओर से जारी वीडियो में बताया गया कि संबंधित गाटा संख्या 541 और 1339 फसली राजस्व अभिलेखों में कब्रिस्तान के नाम दर्ज हैं। प्रशासन के मुताबिक, इन जमीनों पर दुकानें बनाकर उनके ऊपर मस्जिद का निर्माण किया गया है। तहसीलदार ने कहा कि इस मामले को लेकर न्यायालय में मुकदमा चला, लेकिन उनके अनुसार निर्माण से संबंधित कब्जा नहीं हटाया गया। इसी के बाद नोटिस जारी किया गया है और नोटिस की अवधि समाप्त होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मस्जिद कमेटी की दूसरी प्रेस वार्ता

10 अक्टूबर को फिर सामने आया मस्जिद कमेटी का पक्ष
10 अक्टूबर को मस्जिद कमेटी ने दोबारा प्रेस वार्ता कर न्यायालय की कार्यवाही से संबंधित जानकारी साझा की। कमेटी के सदस्यों ने बताया कि 4 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने स्टे बरकरार रखते हुए तीन सप्ताह बाद की तारीख दी थी। कमेटी के मुताबिक, जब प्रशासनिक अधिकारी नोटिस चस्पा करने पहुंचे थे, उस समय उनके पास अगली तारीख और स्टे बरकरार रहने से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। अब ये दस्तावेज प्राप्त होने के बाद कमेटी ने इन्हें तहसील प्रशासन और जिलाधिकारी को भेज दिया है।
कमेटी ने कहा कि न्यायालय में मामला लंबित है और सभी संबंधित पक्षों को न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए। कमेटी ने प्रशासन से भी न्यायालय के आदेशों और उपलब्ध दस्तावेजों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई करने की अपील की।

युवाओं से सोशल मीडिया पर खामोश रहने की अपील
प्रेस वार्ता के दौरान मस्जिद कमेटी ने युवाओं से खास अपील की कि वे इस मामले को लेकर सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर अनावश्यक बयानबाजी से बचें। कमेटी ने कहा कि जिम्मेदार लोग कानूनी स्तर पर इस मामले को देख रहे हैं। ऐसे में युवाओं को संयम बरतना चाहिए और न्यायालय की प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए।

फिलहाल, इस मामले में मस्जिद कमेटी और तहसील प्रशासन के पक्ष सामने आए हैं। अब आगे की कार्रवाई में न्यायालय के आदेशों और संबंधित राजस्व अभिलेखों की क्या भूमिका रहती है, इस पर नजर रहेगी।

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