- सिधौली की सियासत में हलचल तेज़, चेहरा ज़रूर नया है लेकिन नाम पुराना जुड़ा है।
- कमिश्नरी छोड़ सिधौली की सियासत में ले रहीं दिलचस्बी
- सियासी रण में मज़बूत दावेदारी पेश कर रहीं अनुपमा सरोज
● रेहान अंसारी
सीतापुर जनपद की सिधौली विधानसभा सीट पर सियासी घमासान तेज़ हो चुका है। सिधौली क्षेत्र मे अनुपमा सरोज की सक्रियता से सिधौली की राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज़ हो गई है। वर्तमान से लेकर पूर्व विधायक तक कि दिलों की धड़कन बढ़ गई है। इस सीट पर वर्तमान समय में भारतीय जनता पार्टी के मनीष रावत विधायक हैं। मनीष रावत ने समाजवादी पार्टी के डॉ हरगोविंद भार्गव को 9716 वोटों से हरा कर करीब 42 साल बाद बीजेपी की जीत दिलाई थी। हालांकि इस सीट की बात करें तो पिछले 20 सालों में मनीष रावत और डॉ हरगोविंद भार्गव के बीच अदला बदली रही है। फिर चाहे पार्टी कोई भी हो। अनुपमा सरोज के आने से इन दोनों की नेताओं की धड़कन ज़रूर बढ़ गई होगी। सपा के टिकट पर लड़ने वाले डॉ हरगोविंद भार्गव का क्या होगा क्या डॉ साहब कोई और दरज़वा खटखटाएंगे हालांकि टिकट पक्का करने के लिए नेता किसी भी दरवाज़े या दल में जाने से नहीं हिचकिचाते।
अब बात करते हैं सिधौली सीट की सियासत की अनुपमा सरोज के मैदान में आने से इस विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में बड़ा दिलचस्प मोड़ आ गया है। अनुपमा सरोज भी कोई मामूली नाम नहीं है। अगर सिर्फ उनकी बात की जाए तो वो एक पढ़ी लिखी और खुद के पैरों खड़ी एक कामयाब महिला हैं या यूं कहें कि कामयाब अफसर हैं। हालांकि अब वो अफसर हैं नहीं थीं। क्योंकि हाल ही में उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं से इस्तीफा दे दिया है। अनुपमा सरोज गुड्स एन्ड सर्विस टैक्स (GST) विभाग में डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनात थीं अनुपम सरोज को गायकी में भी बड़ी दिलचस्पी है उन्होंने बॉलीवुड में कई एल्बमों के लिए लंबे समय तक रिकॉर्ड भी किया है। अनुपमा सरोज पूर्व सांसद और विधायक रहीं सुशीला सरोज की बिटिया हैं सुशीला सरोज समाजवादी पार्टी में महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। अनुपमा के पिता उत्तर प्रदेश में ही पूर्व आईपीएस अफसर रह चुके हैं। बात की जाए अनुपमा के हमसफ़र की तो वो उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग भदौरिया हैं। जिससे अनुपमा का राजनीतिक सफर और मज़बूत हो जाता है। अनुपमा के परिवार का राजनीती में अब आप प्रभाव जान ही गए होंगे। इसी के साथ अनुपमा के समाजवादी पार्टी के साथ रिश्ते और मज़बूत होते दिखाई देते हैं। सिधौली में सपा के टिकट की आस लगाए बैठे नेता जनों को दूसरा रास्ता खोज लेना चाहिए। हालांकि समाजवादी पार्टी की तरफ से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन सेवा से पहले स्वैछि सेवानिवृत्त (वीआरएस) लेने का मतलब साफ ज़ाहिर है।
अनुपमा सरोज के मैदान में आने से सिधौली में एक नए नेतृत्व और नए विज़न के साथ देखा जा रहा है। क्योंकि शिक्षा जनसरोकार से जुड़ीं अनुपमा सरोज का प्रशासनिक समझ और फिर कई पीढ़ियों की राजनीतिक सुचिता ज़मीनी हक़ीक़त को और मज़बूत करती है। शासन से प्रशासन तक का सफर अनुपमा खूब समझती होंगी। और सिधौलीवासियों को भी नए चेहरे नाम और नेतृत्व की ज़रूरत होगी क्योंकि पिछले बीस वर्षों से बस दो ही नाम उनके आगे पीछे घूम रहे हैं। ऐसे में अनुपमा सरोज का मैदान में आना मतदाताओं को भी भा सकता है। हालांकि राजनीति में कयास तो खूब लगाए जाते हैं लेकिन अंत मे जनता ही मोहर लगाती है। अब देखना यह होगा कि सिधौली की सीट पर फिर वही पुराना नाम मतदाता पुकारेंगे या फिर नई महिला के हांथो में नेतृत्व सौपेंगे। हालांकि यह तो वक़्त ही बताएगा अभी तो बस कयासों का बाज़ार गर्म है।



