मशहूर शायर जनाब इश्तियाक़ अली सबाؔ का इन्तेकाल उर्दू अदब का बड़ा नुकसान

  • बज़्मे उर्दू सोसाइटी ने जताया गहरा शोक

सीतापुर (पंच पथ न्यूज़)। बज़्मे उर्दू सोसाइटी के पदाधिकारियों व सदस्यों ने एक संयुक्त प्रेस नोट के ज़रिए सोसाइटी के पुराने साथी, अनुभवी शाइर जनाब इश्तियाक़ अली सबाؔ (सबा बाराबंकवी) के निधन पर गहरे रंज-ओ-ग़म और दिली सदमे का इज़हार किया है। याद रहे कि सबा बाराबंकवी लम्बे अर्से तक बज़्मे उर्दू के उपाध्यक्ष रहे और बज़्मे उर्दू को मज़बूत बनाने में अहम किरदार अदा किया।
बज़्मे उर्दू के अध्यक्ष मस्त हफ़ीज़ रहमानी ने सबा बाबंकवी के निधन पर कहा कि सबाؔ साहब का इन्तेकाल न सिर्फ़ उर्दू अदब का एक बड़ा नुक़सान है बल्कि बज़्मे उर्दू के लिए एक गहरा निजी सदमा भी है। उन्होंने लम्बे समय बज़्मे उर्दू से जुड़े रहकर भाषा और साहित्य की सेवा की है। उन्होने अपनी शाइरी के ज़रिए समाज के मसाइल की हक़ीक़ी अकासी की। बज़्मे उर्दू के मौजूदा उपाध्यक्ष डॉ. सुहैल वहीद ने कहा कि सबाؔ बाराबंकवी एक नेक दिल इंसान और अच्छे स्वभाव़ शाइर थे, उनके चले जाने से उर्दू दुनिया में जो रिक्तता पैदा हुई है उसे पूरा करना आसान नहीं होगा। महामन्त्री ख़ुश्तर रहमानी ने गहरा दुख जताते हुए कहा कि मरहूम की साहित्यिक औा सांगठनिक सेवाओं को हमेशा याद रखा जाएगा। इसी कड़ी में बज़्मे उर्दू सोसाइटी की खीरी इकाई के अध्यक्ष इलियास चिश्ती और बिसवां तहसील के सदर अनवर अली ने भी भी गहरा दुख का जताते हुए मरहूम शाइर को ज़बर्दस्त श्रद्धांजलि)पेश की।
इस दुख की घड़ी में बज़्मे उर्दू सोसाइटी के तमाम सदस्यों की ओर से गहरे अफ़सोस का इज़हार किया गया है, जिनमें रिज़वान अली ख़ान, अबूज़र नोमान, अन्ज़र हस्सान, महफ़ूज़ रहमानी, मोहम्मद असलम एडवोकेट, शहाब वहीद, अच्छे बेग और नियाज़ हुसैन के नाम प्रमुख तौर पर शामिल हैं।

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