
सीतापुर, खैराबाद (पंच पथ न्यूज़)। कस्बा खैराबाद के मोहल्ला मियां सराय में 10वीं मोहर्रम का ताज़िया पूरे धार्मिक सम्मान, अकीदत और गमगीन माहौल के बीच रखा गया। ताज़िए को चौक पर स्थापित किए जाने से पहले अंजुमन और स्थानीय अकीदतमंदों द्वारा दर्दभरे नौहे और मर्सिए पढ़े गए, जिनमें कर्बला की दर्दनाक घटना और हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) व उनके साथियों की अज़ीम कुर्बानियों को याद किया गया। इसके बाद पूरे अदब और एहतराम के साथ सलाम पेश किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद अकीदतमंद गम में डूबे नज़र आए।
ताज़िए के दीदार और ज़ियारत के लिए मोहल्ले के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। लोगों ने शहीदाने कर्बला को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करते हुए फ़ातेहा पढ़ी और मुल्क में अमन, भाईचारे तथा खुशहाली की दुआ की।
मोहर्रम के अवसर पर पूरे मोहल्ले में गम और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। मजलिसों में कर्बला के वाक़ियात बयान किए गए और इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि कर्बला का संदेश इंसानियत, न्याय, सब्र, त्याग और ज़ुल्म के विरुद्ध डटकर खड़े होने की प्रेरणा देता है।
ताज़िए की व्यवस्था और आयोजन में मोहम्मद आमिर, मोहम्मद दानिश, अमर, अशोक जायसवाल, अरमान, फरहान, असद और चाँद बाबू सहित मोहल्ले के सभी लोगों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया। युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर पूरे आयोजन को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया। आयोजन के दौरान मोहल्ले में गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी भाईचारे की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली।
मोहम्मद आमिर ने कहा, “मोहर्रम हमें हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी, सब्र और इंसाफ़ के रास्ते पर चलने की सीख देता है। हमारा प्रयास रहता है कि हर वर्ष मोहल्ले के सभी लोगों के सहयोग से यह आयोजन पूरी अकीदत और अनुशासन के साथ संपन्न हो।”
मोहम्मद दानिश ने कहा, “कर्बला का पैग़ाम पूरी इंसानियत के लिए है। यह हमें प्रेम, भाईचारे, इंसाफ़ और ज़ुल्म के खिलाफ़ डटकर खड़े होने की प्रेरणा देता है। मोहल्ले के सभी लोगों का सहयोग ही इस आयोजन की सबसे बड़ी ताकत है।”
कार्यक्रम के दौरान अकीदतमंदों के लिए शरबत और मिठाई का भी वितरण किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद स्वरूप शरबत ग्रहण किया। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की भी अच्छी-खासी मौजूदगी रही। अंत में सभी ने शहीदाने कर्बला की याद में दुआ की और हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की शिक्षाओं पर अमल करने का संकल्प लिया।



