“मेहनत हमारी, पैसा हमारा… फिर भी मजदूर क्यों परेशान, रसूखदारों का मज़दूरों पर ऐसा ज़ुल्म?”

  • मजदूरों का पैदल मार्च पुलिस ने रोका, 115 श्रमिकों की करीब एक करोड़ रुपये मजदूरी बकाया
  • जेबी दारूका पेपर मिल कटीली का मामला, भुगतान न मिलने पर मजदूरों ने मिल मालिकों के खिलाफ दी तहरीर

सीतापुर (पंच पथ न्यूज़)। मेहनत-मजदूरी करने के बाद भी जब पसीने की कमाई नहीं मिली तो अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए मजदूरों ने लखनऊ पैदल मार्च का फैसला किया। बुधवार को बकाया मजदूरी की मांग को लेकर लखनऊ जाने के लिए मजदूर गल्ला मंडी गेट पर पहुंचे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। मामला कटीली स्थित जेबी दारूका पेपर मिल का है, जहां मजदूरों के अनुसार 115 श्रमिकों की करीब एक करोड़ रुपये की मजदूरी बकाया है।श्रमिकों का आरोप है कि फैक्ट्री बंद होने के कारण उनका भुगतान फंसा हुआ है। करीब तीन महीने का वेतन बकाया बताया जा रहा है। किसी मजदूर का 20 हजार रुपये तो किसी का 25 हजार रुपये तक भुगतान बाकी है। मजदूरों का कहना है कि मेहनत से कमाई गई रकम के लिए उन्हें बार-बार गुहार लगानी पड़ रही है, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

बताया जा रहा है कि प्रशासन की मध्यस्थता के बावजूद भुगतान नहीं होने पर मजदूरों ने मिल मालिकों के खिलाफ तहरीर दी है। श्रमिकों का कहना है कि वे मामले में मुकदमा दर्ज कराने के लिए तैयार हैं और उन्हें उम्मीद है कि उनकी शिकायत पर संबंधित धाराओं में कार्रवाई होगी, जिससे उन्हें न्याय मिल सके।मजदूरों के मार्च को रोकने और मामले को शांत कराने के लिए एसडीएम सदर डॉ. जनार्दन और शहर कोतवाल मौके पर पहुंचे। प्रशासन की ओर से मजदूरों को जल्द भुगतान कराने का आश्वासन दिया गया। हालांकि, मजदूरों की बकाया रकम कब तक मिलेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर मजदूरों के अधिकारों और उनकी मेहनत की कमाई के भुगतान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर तीन महीने की मजदूरी के लिए श्रमिकों को सड़क पर उतरने और लखनऊ तक पैदल जाने की नौबत क्यों आई? यदि मजदूरों का करीब एक करोड़ रुपये बकाया है, तो उनके भुगतान की जिम्मेदारी कौन तय करेगा?

Related Articles

Back to top button